निरंजन शाह ने सीओए के अंपायरो को घरेलु क्रिकेटर्स से ज़्यादा वेतन देने के फैसले पर उठाये सवाल

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति (सीओए) ने 12 अप्रैल को बैठक की थी और इस दौरान विभिन्न फैसलों में से अंपायर, मैच रेफरी, क्यूरेटर, स्कोरर्स और वीडियो विश्लेषकों की फीस बढ़ाने का फैसला लिया गया था | 

साथ ही ये भी फैंसला लिया गया था कि 3 सदस्यीय चयन पैनल के लिए एक नई वेतन संरचना पर काम किया जाएगा | जिसके बाद बुधवार (30 मई) को बीसीसीआई की वेबसाइट पर इसकी पुष्टि की गई हैं |

पूर्व बीसीसीआई सचिव निरंजन शाह को सीओए का ये कदम कुछ ठीक नहीं लगा | उनका मानना हैं कि खिलाड़ियों की तुलना में अंपायरों को ज्यादा भुगतान करना अनुचित है |
 
क्रिकेटनेक्स्ट की रिपोर्ट के अनुसार शाह ने कहा हैं कि, "हालांकि मैं अंपायर और अन्य मैच अधिकारियों की मैच फीस में बढ़ोतरी का स्वागत करता हूँ, लेकिन यह वास्तव में हैरान और आश्चर्यजनक करने वाला फैसला है कि अंपायरों की अनुशंसित मैच फीस घरेलू वरिष्ठ खिलाड़ियों की तुलना में अधिक होगी, जो कि प्रति दिन 35000 रुपये है | मैं इस बात को समझ नहीं पा रहा हूँ, कि अंपायरों की फीस खिलाड़ियों से ज्यादा कैसे हो सकती है?" 

शाह ने आगे बताया हैं कि पूर्व खिलाड़ियों की हालिया हाहाकार और घरेलू क्रिकेटरों की खराब देखरेख से लोग इनका महत्व भूलते जा रहे हैं | उन्होंने कहा हैं कि, "पिछले कुछ सालों से घरेलू खिलाड़ियों को  बहुत अनदेखा किया जा रहा है | घरेलू क्रिकेट, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में खिलाड़ियों के पहुंचने का सबसे महत्वपूर्ण और विश्वसनीय मंच है |"

उनोने आगे कहा कि, "सभी संघों ने बीसीसीआई के सभी घरेलू टूर्नामेंटों के लिए अपनी संबंधित घरेलू टीमों को बनाने में काफी प्रयास किए हैं | लेकिन हमारे कई लोगों के अज्ञात कारणों की वजह से, घरेलू खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया जा रहा है | 2017-18 के पिछले घरेलू सत्र के बाद से रणजी ट्रॉफी के लिए प्रत्येक टीम को पहले प्रारूप की तुलना में दो कम लीग मैच मिल रहे हैं, जिससे कि खिलाड़ियों को काफी वित्तीय नुकसान हो रहा हैं |"


By Pooja Soni - 31 May, 2018

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